Skip to main content

मुफ़्त पाठ · ज्योतिष की मूल बातें

ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे: राशियाँ, कुंडली के 12 भाव और नवग्रह

शुरुआत करने वालों के लिए: 12 राशियाँ और उनके स्वामी, कुंडली के 12 भाव और हर लग्न के लिए उनके स्वामी, और नवग्रह। हर बात शास्त्र के अध्याय और श्लोक के साथ।

लेखक · प्रकाशित · अपडेट · BPHS (आर. संथानम अनुवाद) से जाँचा गया

संक्षेप में

ज्योतिष (अंग्रेज़ी में astrology) भारत का पारंपरिक शास्त्र है, जो जन्म की सही तारीख, समय और स्थान से बनी कुंडली को पढ़ता है। ज्योतिष शास्त्र सीखने का क्रम है: पहले 12 राशियाँ और उनके स्वामी ग्रह, फिर कुंडली के 12 भाव, फिर नवग्रह, और अंत में दशा। इस पेज की हर बात बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) के अध्याय और श्लोक के साथ दी गई है।

12 राशियाँ और उनके स्वामी कौन हैं?

उत्तर भारतीय कुंडली में हर भाव में लिखी संख्या उस राशि की संख्या है: 1 मेष, 2 वृषभ, और इसी तरह 12 मीन तक।

संख्या राशि अंग्रेज़ी नाम स्वामी ग्रह
1 मेष Aries मंगल
2 वृषभ Taurus शुक्र
3 मिथुन Gemini बुध
4 कर्क Cancer चंद्र
5 सिंह Leo सूर्य
6 कन्या Virgo बुध
7 तुला Libra शुक्र
8 वृश्चिक Scorpio मंगल
9 धनु Sagittarius गुरु
10 मकर Capricorn शनि
11 कुंभ Aquarius शनि
12 मीन Pisces गुरु

राशियों के स्वामी: BPHS अध्याय 3 श्लोक 51-54। राहु और केतु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं।

कुंडली के 12 भाव क्या दिखाते हैं?

लग्न (पहला भाव) से गिनती करके 12 भाव बनते हैं। हर भाव जीवन के कुछ क्षेत्र दिखाता है।

भाव नाम BPHS के अनुसार क्या दिखाता है
पहला भाव तनु शरीर, रूप, बुद्धि, रंग, बल, सुख-दुख और स्वभाव (श्लोक 2)
दूसरा भाव धन धन, भोजन, परिवार, धातु और रत्न (श्लोक 3)
तीसरा भाव सहज साहस, भाई-बहन, सहायक, शिक्षा और यात्राएँ (श्लोक 4)
चौथा भाव बंधु माता, संबंधी, वाहन, सुख-सुविधाएँ, भूमि और भवन (श्लोक 5)
पाँचवाँ भाव पुत्र संतान, विद्या और ज्ञान, मंत्र, और अधिकार व उसकी हानि (श्लोक 6)
छठा भाव अरि शत्रु, घाव, मामा और सौतेली माँ (श्लोक 7)
सातवाँ भाव युवती जीवनसाथी और विवाह, यात्रा और व्यापार (श्लोक 8)
आठवाँ भाव रंध्र आयु, युद्ध और शत्रु, मृत व्यक्ति का धन (विरासत), भूत और भविष्य (श्लोक 9)
नौवाँ भाव धर्म भाग्य, धर्म और तीर्थ, जीवनसाथी का भाई और भाई की पत्नी (श्लोक 10)
दसवाँ भाव कर्म कर्म (व्यवसाय), अधिकार, सम्मान, पिता, विदेश में रहना और ऋण (श्लोक 11)
ग्यारहवाँ भाव लाभ आय, लाभ और समृद्धि, पुत्रवधू (श्लोक 12)
बारहवाँ भाव व्यय व्यय, शत्रुओं के गुप्त काम, और जीवन का अंत (श्लोक 13)

भावों के फल: BPHS अध्याय 11 श्लोक 2-13।

कुंडली में 12 भाव के स्वामी कौन हैं?

किसी भाव का स्वामी वह ग्रह है जो उस भाव में पड़ी राशि का स्वामी है। उदाहरण: मेष लग्न में सातवें भाव में तुला राशि पड़ती है, इसलिए सातवें भाव का स्वामी शुक्र है। नीचे हर लग्न के लिए 1 से 12 भाव के स्वामी हैं।

लग्न 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
मेष मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु
वृषभ शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल
मिथुन बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र
कर्क चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध
सिंह सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र
कन्या बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य
तुला शुक्र मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध
वृश्चिक मंगल गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र
धनु गुरु शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल
मकर शनि शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु
कुंभ शनि गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि
मीन गुरु मंगल शुक्र बुध चंद्र सूर्य बुध शुक्र मंगल गुरु शनि शनि

राशि-आधारित (whole-sign) भाव। स्वामी ऊपर की तालिका से गिने गए हैं, लिखे नहीं गए।

नवग्रह कौन से हैं?

कुंडली में नौ ग्रह देखे जाते हैं। राहु और केतु भौतिक पिंड नहीं हैं: वे चंद्रमा के उत्तर और दक्षिण पात (nodes) हैं, इसलिए इन्हें छाया ग्रह कहते हैं (BPHS अध्याय 3 श्लोक 11)।

ग्रह अंग्रेज़ी नाम स्वामी राशियाँ
सूर्य Sun सिंह
चंद्र Moon कर्क
मंगल Mars मेष और वृश्चिक
बुध Mercury मिथुन और कन्या
गुरु Jupiter धनु और मीन
शुक्र Venus वृषभ और तुला
शनि Saturn मकर और कुंभ
राहु Rahu कोई राशि नहीं (छाया ग्रह)
केतु Ketu कोई राशि नहीं (छाया ग्रह)

ज्योतिष सीखने का सही क्रम क्या है?

  1. 1

    राशियाँ और उनके स्वामी

    12 राशियाँ और हर राशि का स्वामी ग्रह याद करें (ऊपर की तालिका)।

  2. 2

    कुंडली के 12 भाव

    लग्न से भाव गिनें और जानें कि हर भाव क्या दिखाता है।

  3. 3

    नवग्रह

    जानें कि कौन सा ग्रह किस भाव में है, और वह किन भावों का स्वामी है।

  4. 4

    दशा

    विंशोत्तरी दशा बताती है कि कौन सा ग्रह कब फल देगा। अपनी कुंडली पर अभ्यास करें।

ज्योतिष के बारे में सवाल

ज्योतिष क्या है?

ज्योतिष (Jyotish) भारत का पारंपरिक शास्त्र है। यह जन्म की सही तारीख, समय और स्थान पर बनी कुंडली पढ़ता है, निरयन (sidereal) राशिचक्र का उपयोग करता है, और दशाओं से समय बताता है।

ज्योतिष को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

ज्योतिष को अंग्रेज़ी में astrology कहते हैं, और भारतीय ज्योतिष को Vedic astrology।

ज्योतिष शास्त्र कैसे सीखे?

क्रम से: पहले 12 राशियाँ और उनके स्वामी, फिर कुंडली के 12 भाव, फिर नवग्रह, और फिर दशा। हर कदम अपनी कुंडली पर आज़माएँ। Astrojar आपकी कुंडली मुफ़्त दिखाता है: साइन अप करें और अपना चार्ट कार्ड देखें।

कुंडली में कितने भाव होते हैं?

12 भाव: तनु, धन, सहज, बंधु, पुत्र, अरि, युवती, रंध्र, धर्म, कर्म, लाभ और व्यय। पहला भाव लग्न है।

नवग्रह कौन से हैं?

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।

क्या ज्योतिष सच होता है?

कोई भी पक्की भविष्यवाणी का वादा नहीं कर सकता। कुंडली प्रवृत्तियाँ और समय-अवधियाँ पारंपरिक नियमों से दिखाती है। Astrojar अपने समय के नियमों को असली, तारीख वाली जीवन-घटनाओं पर जाँचता है और साफ़ बताता है कि क्या काम करता है।

स्रोत

  • BPHS अध्याय 3 श्लोक 11 और 51-54 (ग्रह और राशियों के स्वामी)।
  • BPHS अध्याय 11 श्लोक 2-13 (हर भाव क्या दिखाता है)।

अध्याय और श्लोक संख्याएँ आर. संथानम के अंग्रेज़ी अनुवाद (Ranjan Publications) के अनुसार हैं।

यह शास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या है, सीखने और समझने के लिए। यह आपके लिए भविष्यवाणी नहीं है, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह है।

अपनी कुंडली के बारे में पूछें

Astrojar से हिंदी में पूछें, आपकी अपनी कुंडली से: पहले 3 सवाल मुफ़्त।