नक्षत्र · मृगशिरा
मृगशिरा नक्षत्र: स्वामी मंगल, वृषभ और मिथुन राशि में
मृगशिरा 27 नक्षत्रों में पाँचवाँ है। इसकी राशि और चरण, इसका स्वामी और दशा, मिलान के लिए इसका गण, योनि और नाड़ी, और मुहूर्त के लिए इसका स्वभाव।
संक्षेप में
मृगशिरा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में पाँचवाँ है, निरयन राशिचक्र का 53°20'–66°40', चरण 1, 2 वृषभ (Taurus) में और चरण 3, 4 मिथुन (Gemini) में। इसका स्वामी मंगल है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों के जीवन की शुरुआत मंगल की 7 वर्ष की विंशोत्तरी दशा से होती है। यह देव गण और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है।
मृगशिरा नक्षत्र एक नज़र में
| मृगशिरा | |
|---|---|
| क्रम | 27 में से पाँचवाँ |
| अंश | निरयन राशिचक्र का 53°20'–66°40' |
| राशि | चरण 1, 2 वृषभ (Taurus) में और चरण 3, 4 मिथुन (Gemini) में |
| स्वामी | मंगल, जिसकी विंशोत्तरी दशा 7 वर्ष की होती है |
| गण | देव |
| योनि | सर्प (साँप) |
| नाड़ी | मध्य |
| स्वभाव (मुहूर्त) | मृदु (कोमल) |
| विवाह नक्षत्र | हाँ, ग्यारह में से एक (मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6) |
मृगशिरा नक्षत्र के 4 चरण
हर चरण 3°20' का है। जब नक्षत्र दो राशियों में फैला हो तो चरण राशि तय करता है, और चंद्रमा को नवांश (D9) की एक राशि में रखता है।
| चरण | अंश | राशि | नवांश राशि |
|---|---|---|---|
| चरण 1 | 53°20'–56°40' | वृषभ (Taurus) | सिंह (Leo) |
| चरण 2 | 56°40'–60° | वृषभ (Taurus) | कन्या (Virgo) |
| चरण 3 | 60°–63°20' | मिथुन (Gemini) | तुला (Libra) |
| चरण 4 | 63°20'–66°40' | मिथुन (Gemini) | वृश्चिक (Scorpio) |
आगे पढ़ें: वृषभ (Taurus) और मिथुन (Gemini)।
मृगशिरा नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा
मृगशिरा का स्वामी मंगल है, और चित्रा और धनिष्ठा का भी। मृगशिरा की बिल्कुल शुरुआत में जन्मे व्यक्ति के सामने मंगल की दशा के पूरे 7 वर्ष होते हैं; अंत के पास जन्मे के सामने थोड़े ही। अगली दशा राहु की होती है। मंगल मंत्र और उपाय देखें।
मिलान और मुहूर्त में मृगशिरा
अष्टकूट मिलान में मृगशिरा जन्म नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी देता है: देव, सर्प (साँप) और मध्य। एक ही नाड़ी वाले दो लोगों को इसके 8 में से 0 अंक मिलते हैं, यानी नाड़ी दोष, जब तक चरक की बताई कोई छूट लागू न हो। दो नक्षत्र मुफ़्त नक्षत्र मिलान (अंग्रेज़ी में) पर जाँचें।
मुहूर्त के लिए मृगशिरा मृदु (कोमल) स्वभाव का नक्षत्र है, जो इनके लिए अनुकूल है: मित्रता, कला और संगीत, नए कपड़े और गहने, उत्सव। यह विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में से एक है।
मृगशिरा नक्षत्र के बारे में सवाल
मृगशिरा नक्षत्र किस राशि में है?
मृगशिरा के चरण 1, 2 वृषभ (Taurus) में और चरण 3, 4 मिथुन (Gemini) में हैं। आपकी राशि कौन सी है, यह आपके चरण पर निर्भर है।
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मृगशिरा का स्वामी मंगल है, जो चित्रा और धनिष्ठा का भी स्वामी है। अगर आपका जन्म मृगशिरा में हुआ है, तो आपकी पहली विंशोत्तरी दशा मंगल की है, जो पूरी 7 वर्ष की होती है।
मृगशिरा नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
मृगशिरा देव गण, सर्प (साँप) योनि और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है (के. एस. चरक की तालिकाएँ)। ये अष्टकूट मिलान में काम आते हैं।
क्या मृगशिरा नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
विवाह की तारीख के लिए, हाँ: मृगशिरा उन ग्यारह नक्षत्रों में से एक है जो मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6 विवाह के लिए बताता है। किसी जोड़े के लिए अकेला नक्षत्र नहीं, बल्कि दोनों के जन्म नक्षत्रों का मिलान मायने रखता है।
मृगशिरा नक्षत्र को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
अंग्रेज़ी में मृगशिरा को Mrigashira लिखते हैं: वैदिक राशिचक्र का पाँचवाँ नक्षत्र (lunar mansion), निरयन राशिचक्र का 53°20' से 66°40', Taurus और Gemini में।
स्रोत
- 13°20' के 27 नक्षत्र और 3°20' के 4 चरण: Astrojar का इंजन (लाहिड़ी अयनांश, निरयन राशिचक्र)।
- नक्षत्रों के स्वामी और विंशोत्तरी वर्ष: BPHS का विंशोत्तरी दशा अध्याय, जैसे Astrojar के इंजन में दर्ज है (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17 वर्ष)।
- गण, योनि और नाड़ी: के. एस. चरक, Elements of Vedic Astrology, अध्याय XXVII (पृ. 456, 458, 460), वही तालिकाएँ जो Astrojar का नक्षत्र मिलान इस्तेमाल करता है।
- मुहूर्त के लिए हर नक्षत्र का स्वभाव: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 2। विवाह के ग्यारह नक्षत्र: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6।
यह शास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या है, सीखने और समझने के लिए। यह आपके लिए भविष्यवाणी नहीं है, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह है।
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