नक्षत्र · पुनर्वसु
पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी गुरु, मिथुन और कर्क राशि में
पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सातवाँ है। इसकी राशि और चरण, इसका स्वामी और दशा, मिलान के लिए इसका गण, योनि और नाड़ी, और मुहूर्त के लिए इसका स्वभाव।
संक्षेप में
पुनर्वसु नक्षत्र 27 नक्षत्रों में सातवाँ है, निरयन राशिचक्र का 80°–93°20', चरण 1, 2, 3 मिथुन (Gemini) में और चरण 4 कर्क (Cancer) में। इसका स्वामी गुरु है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों के जीवन की शुरुआत गुरु की 16 वर्ष की विंशोत्तरी दशा से होती है। यह देव गण और आद्य नाड़ी का नक्षत्र है।
पुनर्वसु नक्षत्र एक नज़र में
| पुनर्वसु | |
|---|---|
| क्रम | 27 में से सातवाँ |
| अंश | निरयन राशिचक्र का 80°–93°20' |
| राशि | चरण 1, 2, 3 मिथुन (Gemini) में और चरण 4 कर्क (Cancer) में |
| स्वामी | गुरु, जिसकी विंशोत्तरी दशा 16 वर्ष की होती है |
| गण | देव |
| योनि | मार्जार (बिल्ली) |
| नाड़ी | आद्य |
| स्वभाव (मुहूर्त) | चर (चल) |
| विवाह नक्षत्र | नहीं |
पुनर्वसु नक्षत्र के 4 चरण
हर चरण 3°20' का है। जब नक्षत्र दो राशियों में फैला हो तो चरण राशि तय करता है, और चंद्रमा को नवांश (D9) की एक राशि में रखता है।
| चरण | अंश | राशि | नवांश राशि |
|---|---|---|---|
| चरण 1 | 80°–83°20' | मिथुन (Gemini) | मेष (Aries) |
| चरण 2 | 83°20'–86°40' | मिथुन (Gemini) | वृषभ (Taurus) |
| चरण 3 | 86°40'–90° | मिथुन (Gemini) | मिथुन (Gemini) |
| चरण 4 | 90°–93°20' | कर्क (Cancer) | कर्क (Cancer) |
आगे पढ़ें: मिथुन (Gemini) और कर्क (Cancer)।
पुनर्वसु नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा
पुनर्वसु का स्वामी गुरु है, और विशाखा और पूर्वा भाद्रपद का भी। पुनर्वसु की बिल्कुल शुरुआत में जन्मे व्यक्ति के सामने गुरु की दशा के पूरे 16 वर्ष होते हैं; अंत के पास जन्मे के सामने थोड़े ही। अगली दशा शनि की होती है। गुरु मंत्र और उपाय देखें।
मिलान और मुहूर्त में पुनर्वसु
अष्टकूट मिलान में पुनर्वसु जन्म नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी देता है: देव, मार्जार (बिल्ली) और आद्य। एक ही नाड़ी वाले दो लोगों को इसके 8 में से 0 अंक मिलते हैं, यानी नाड़ी दोष, जब तक चरक की बताई कोई छूट लागू न हो। दो नक्षत्र मुफ़्त नक्षत्र मिलान (अंग्रेज़ी में) पर जाँचें।
मुहूर्त के लिए पुनर्वसु चर (चल) स्वभाव का नक्षत्र है, जो इनके लिए अनुकूल है: यात्रा, वाहन और घूमना-फिरना। यह विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में नहीं है।
पुनर्वसु नक्षत्र के बारे में सवाल
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में है?
पुनर्वसु के चरण 1, 2, 3 मिथुन (Gemini) में और चरण 4 कर्क (Cancer) में हैं। आपकी राशि कौन सी है, यह आपके चरण पर निर्भर है।
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुनर्वसु का स्वामी गुरु है, जो विशाखा और पूर्वा भाद्रपद का भी स्वामी है। अगर आपका जन्म पुनर्वसु में हुआ है, तो आपकी पहली विंशोत्तरी दशा गुरु की है, जो पूरी 16 वर्ष की होती है।
पुनर्वसु नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
पुनर्वसु देव गण, मार्जार (बिल्ली) योनि और आद्य नाड़ी का नक्षत्र है (के. एस. चरक की तालिकाएँ)। ये अष्टकूट मिलान में काम आते हैं।
क्या पुनर्वसु नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
विवाह की तारीख के लिए, पुनर्वसु मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6 के ग्यारह विवाह नक्षत्रों में नहीं है। किसी जोड़े के लिए अकेला नक्षत्र नहीं, बल्कि दोनों के जन्म नक्षत्रों का मिलान मायने रखता है।
पुनर्वसु नक्षत्र को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
अंग्रेज़ी में पुनर्वसु को Punarvasu लिखते हैं: वैदिक राशिचक्र का सातवाँ नक्षत्र (lunar mansion), निरयन राशिचक्र का 80° से 93°20', Gemini और Cancer में।
स्रोत
- 13°20' के 27 नक्षत्र और 3°20' के 4 चरण: Astrojar का इंजन (लाहिड़ी अयनांश, निरयन राशिचक्र)।
- नक्षत्रों के स्वामी और विंशोत्तरी वर्ष: BPHS का विंशोत्तरी दशा अध्याय, जैसे Astrojar के इंजन में दर्ज है (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17 वर्ष)।
- गण, योनि और नाड़ी: के. एस. चरक, Elements of Vedic Astrology, अध्याय XXVII (पृ. 456, 458, 460), वही तालिकाएँ जो Astrojar का नक्षत्र मिलान इस्तेमाल करता है।
- मुहूर्त के लिए हर नक्षत्र का स्वभाव: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 2। विवाह के ग्यारह नक्षत्र: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6।
यह शास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या है, सीखने और समझने के लिए। यह आपके लिए भविष्यवाणी नहीं है, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह है।
क्या पुनर्वसु आपका जन्म नक्षत्र है?
अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान से मुफ़्त साइन अप करें: आपका चार्ट कार्ड आपका नक्षत्र और चरण, राशि और लग्न दिखाता है, और पहले 3 सवाल मुफ़्त हैं।