Skip to main content

नक्षत्र · पुष्य

पुष्य नक्षत्र: स्वामी शनि, कर्क राशि में

पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ है। इसकी राशि और चरण, इसका स्वामी और दशा, मिलान के लिए इसका गण, योनि और नाड़ी, और मुहूर्त के लिए इसका स्वभाव।

लेखक · प्रकाशित · अपडेट · जाँचा गया: BPHS, के. एस. चरक और मुहूर्त चिंतामणि

संक्षेप में

पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में आठवाँ है, निरयन राशिचक्र का 93°20'–106°40', चारों चरण कर्क (Cancer) में। इसका स्वामी शनि है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों के जीवन की शुरुआत शनि की 19 वर्ष की विंशोत्तरी दशा से होती है। यह देव गण और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है।

पुष्य नक्षत्र एक नज़र में

पुष्य
क्रम 27 में से आठवाँ
अंश निरयन राशिचक्र का 93°20'–106°40'
राशि चारों चरण कर्क (Cancer) में
स्वामी शनि, जिसकी विंशोत्तरी दशा 19 वर्ष की होती है
गण देव
योनि मेष (मेढ़ा)
नाड़ी मध्य
स्वभाव (मुहूर्त) क्षिप्र (शीघ्र)
विवाह नक्षत्र नहीं

पुष्य नक्षत्र के 4 चरण

हर चरण 3°20' का है। जब नक्षत्र दो राशियों में फैला हो तो चरण राशि तय करता है, और चंद्रमा को नवांश (D9) की एक राशि में रखता है।

चरण अंश राशि नवांश राशि
चरण 1 93°20'–96°40' कर्क (Cancer) सिंह (Leo)
चरण 2 96°40'–100° कर्क (Cancer) कन्या (Virgo)
चरण 3 100°–103°20' कर्क (Cancer) तुला (Libra)
चरण 4 103°20'–106°40' कर्क (Cancer) वृश्चिक (Scorpio)

आगे पढ़ें: कर्क (Cancer)।

पुष्य नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा

पुष्य का स्वामी शनि है, और अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद का भी। पुष्य की बिल्कुल शुरुआत में जन्मे व्यक्ति के सामने शनि की दशा के पूरे 19 वर्ष होते हैं; अंत के पास जन्मे के सामने थोड़े ही। अगली दशा बुध की होती है। शनि मंत्र और उपाय देखें।

मिलान और मुहूर्त में पुष्य

अष्टकूट मिलान में पुष्य जन्म नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी देता है: देव, मेष (मेढ़ा) और मध्य। एक ही नाड़ी वाले दो लोगों को इसके 8 में से 0 अंक मिलते हैं, यानी नाड़ी दोष, जब तक चरक की बताई कोई छूट लागू न हो। दो नक्षत्र मुफ़्त नक्षत्र मिलान (अंग्रेज़ी में) पर जाँचें।

मुहूर्त के लिए पुष्य क्षिप्र (शीघ्र) स्वभाव का नक्षत्र है, जो इनके लिए अनुकूल है: जल्दी होने वाले काम: व्यापार, पढ़ाई, दवा और छोटी यात्राएँ। यह विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में नहीं है।

पुष्य नक्षत्र के बारे में सवाल

पुष्य नक्षत्र किस राशि में है?

पुष्य के चारों चरण कर्क (Cancer) में हैं। आपकी राशि कौन सी है, यह आपके चरण पर निर्भर है।

पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?

पुष्य का स्वामी शनि है, जो अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद का भी स्वामी है। अगर आपका जन्म पुष्य में हुआ है, तो आपकी पहली विंशोत्तरी दशा शनि की है, जो पूरी 19 वर्ष की होती है।

पुष्य नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?

पुष्य देव गण, मेष (मेढ़ा) योनि और मध्य नाड़ी का नक्षत्र है (के. एस. चरक की तालिकाएँ)। ये अष्टकूट मिलान में काम आते हैं।

क्या पुष्य नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?

विवाह की तारीख के लिए, पुष्य मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6 के ग्यारह विवाह नक्षत्रों में नहीं है। किसी जोड़े के लिए अकेला नक्षत्र नहीं, बल्कि दोनों के जन्म नक्षत्रों का मिलान मायने रखता है।

पुष्य नक्षत्र को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

अंग्रेज़ी में पुष्य को Pushya लिखते हैं: वैदिक राशिचक्र का आठवाँ नक्षत्र (lunar mansion), निरयन राशिचक्र का 93°20' से 106°40', पूरा Cancer में।

स्रोत

  • 13°20' के 27 नक्षत्र और 3°20' के 4 चरण: Astrojar का इंजन (लाहिड़ी अयनांश, निरयन राशिचक्र)।
  • नक्षत्रों के स्वामी और विंशोत्तरी वर्ष: BPHS का विंशोत्तरी दशा अध्याय, जैसे Astrojar के इंजन में दर्ज है (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17 वर्ष)।
  • गण, योनि और नाड़ी: के. एस. चरक, Elements of Vedic Astrology, अध्याय XXVII (पृ. 456, 458, 460), वही तालिकाएँ जो Astrojar का नक्षत्र मिलान इस्तेमाल करता है।
  • मुहूर्त के लिए हर नक्षत्र का स्वभाव: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 2। विवाह के ग्यारह नक्षत्र: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6।

यह शास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या है, सीखने और समझने के लिए। यह आपके लिए भविष्यवाणी नहीं है, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह है।

क्या पुष्य आपका जन्म नक्षत्र है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान से मुफ़्त साइन अप करें: आपका चार्ट कार्ड आपका नक्षत्र और चरण, राशि और लग्न दिखाता है, और पहले 3 सवाल मुफ़्त हैं।