नक्षत्र · आश्लेषा
आश्लेषा नक्षत्र: स्वामी बुध, कर्क राशि में
आश्लेषा 27 नक्षत्रों में नौवाँ है। इसकी राशि और चरण, इसका स्वामी और दशा, मिलान के लिए इसका गण, योनि और नाड़ी, और मुहूर्त के लिए इसका स्वभाव।
संक्षेप में
आश्लेषा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में नौवाँ है, निरयन राशिचक्र का 106°40'–120°, चारों चरण कर्क (Cancer) में। इसका स्वामी बुध है, इसलिए इसमें जन्मे लोगों के जीवन की शुरुआत बुध की 17 वर्ष की विंशोत्तरी दशा से होती है। यह राक्षस गण और अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है।
आश्लेषा नक्षत्र एक नज़र में
| आश्लेषा | |
|---|---|
| क्रम | 27 में से नौवाँ |
| अंश | निरयन राशिचक्र का 106°40'–120° |
| राशि | चारों चरण कर्क (Cancer) में |
| स्वामी | बुध, जिसकी विंशोत्तरी दशा 17 वर्ष की होती है |
| गण | राक्षस |
| योनि | मार्जार (बिल्ली) |
| नाड़ी | अंत्य |
| स्वभाव (मुहूर्त) | तीक्ष्ण |
| विवाह नक्षत्र | नहीं |
आश्लेषा नक्षत्र के 4 चरण
हर चरण 3°20' का है। जब नक्षत्र दो राशियों में फैला हो तो चरण राशि तय करता है, और चंद्रमा को नवांश (D9) की एक राशि में रखता है।
| चरण | अंश | राशि | नवांश राशि |
|---|---|---|---|
| चरण 1 | 106°40'–110° | कर्क (Cancer) | धनु (Sagittarius) |
| चरण 2 | 110°–113°20' | कर्क (Cancer) | मकर (Capricorn) |
| चरण 3 | 113°20'–116°40' | कर्क (Cancer) | कुंभ (Aquarius) |
| चरण 4 | 116°40'–120° | कर्क (Cancer) | मीन (Pisces) |
आगे पढ़ें: कर्क (Cancer)।
आश्लेषा नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा
आश्लेषा का स्वामी बुध है, और ज्येष्ठा और रेवती का भी। आश्लेषा की बिल्कुल शुरुआत में जन्मे व्यक्ति के सामने बुध की दशा के पूरे 17 वर्ष होते हैं; अंत के पास जन्मे के सामने थोड़े ही। अगली दशा केतु की होती है। बुध मंत्र और उपाय देखें।
मिलान और मुहूर्त में आश्लेषा
अष्टकूट मिलान में आश्लेषा जन्म नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी देता है: राक्षस, मार्जार (बिल्ली) और अंत्य। एक ही नाड़ी वाले दो लोगों को इसके 8 में से 0 अंक मिलते हैं, यानी नाड़ी दोष, जब तक चरक की बताई कोई छूट लागू न हो। दो नक्षत्र मुफ़्त नक्षत्र मिलान (अंग्रेज़ी में) पर जाँचें।
मुहूर्त के लिए आश्लेषा तीक्ष्ण स्वभाव का नक्षत्र है, जो इनके लिए अनुकूल है: जो अब काम का नहीं उसे ख़त्म करना: पुराने कर्ज़ चुकाना और बुरी आदतें छोड़ना। यह विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में नहीं है।
आश्लेषा नक्षत्र के बारे में सवाल
आश्लेषा नक्षत्र किस राशि में है?
आश्लेषा के चारों चरण कर्क (Cancer) में हैं। आपकी राशि कौन सी है, यह आपके चरण पर निर्भर है।
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
आश्लेषा का स्वामी बुध है, जो ज्येष्ठा और रेवती का भी स्वामी है। अगर आपका जन्म आश्लेषा में हुआ है, तो आपकी पहली विंशोत्तरी दशा बुध की है, जो पूरी 17 वर्ष की होती है।
आश्लेषा नक्षत्र का गण, योनि और नाड़ी क्या है?
आश्लेषा राक्षस गण, मार्जार (बिल्ली) योनि और अंत्य नाड़ी का नक्षत्र है (के. एस. चरक की तालिकाएँ)। ये अष्टकूट मिलान में काम आते हैं।
क्या आश्लेषा नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
विवाह की तारीख के लिए, आश्लेषा मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6 के ग्यारह विवाह नक्षत्रों में नहीं है। किसी जोड़े के लिए अकेला नक्षत्र नहीं, बल्कि दोनों के जन्म नक्षत्रों का मिलान मायने रखता है।
आश्लेषा नक्षत्र को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
अंग्रेज़ी में आश्लेषा को Ashlesha लिखते हैं: वैदिक राशिचक्र का नौवाँ नक्षत्र (lunar mansion), निरयन राशिचक्र का 106°40' से 120°, पूरा Cancer में।
स्रोत
- 13°20' के 27 नक्षत्र और 3°20' के 4 चरण: Astrojar का इंजन (लाहिड़ी अयनांश, निरयन राशिचक्र)।
- नक्षत्रों के स्वामी और विंशोत्तरी वर्ष: BPHS का विंशोत्तरी दशा अध्याय, जैसे Astrojar के इंजन में दर्ज है (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17 वर्ष)।
- गण, योनि और नाड़ी: के. एस. चरक, Elements of Vedic Astrology, अध्याय XXVII (पृ. 456, 458, 460), वही तालिकाएँ जो Astrojar का नक्षत्र मिलान इस्तेमाल करता है।
- मुहूर्त के लिए हर नक्षत्र का स्वभाव: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 2। विवाह के ग्यारह नक्षत्र: मुहूर्त चिंतामणि अध्याय 6।
यह शास्त्रों की पारंपरिक व्याख्या है, सीखने और समझने के लिए। यह आपके लिए भविष्यवाणी नहीं है, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह है।
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